Monday, June 30, 2008

बरसात

लघ्जिशों की तमन्ना है ये...
ख़यालों की बरसात
सम्हल कर रहना हमदम मेरे
कभी कभी ये बरसात
मुखौटों के रंग फीकें कर देते हैं..

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