Tuesday, March 10, 2009

जिन्दगी की तस्वीर


तेरी कहानी -
कहीं भी मुझ से
अलग नहीं है दोस्त
तेरी-मेरी उम्र में - कुछ फासला होगा.
कमाई में - कुछ फर्क होगा..
रिश्तों का - कुछ अलग फलसफा होगा..

लेकिन कुछ कम ज्यादा कर
के हालत एक से होते हैं
क्यूंकि जिन्दगी का रंग एक ही होता है..
और इन रंगों की महक भी एक ही होती है.

इसलिए मेरे दोस्त
मैं कहता हूँ कहानी
एक ही है जिन्दगी की
हम लिखते हैं अलग अलग रंगों में
देखते हैं अलग अलग नज़रों से
गढ़ते हैं अलग अलग ख़यालों से
और तय करते हैं - झूठी फितरतों की खातिर
अलग अलग कीमत
अलग अलग रंगों में
रंगी हुयी जिन्दगी/तस्वीरों की !!!

तेरी नज़्म - मेरा दर्द पढ़े..
और मेरी कविता - तेरी जिन्दगी..
एक पहलू में जिन्दगी की तस्वीर एक ही है..
और हर एक शख्स के साथ है
उसकी जिन्दगी की एक अलग तस्वीर.
......